जय जय जगन्नाथ जग के नाथ (Jai Jai Jagannath Jag Ke Nath)

जय जय जगन्नाथ जग के नाथ (Jai Jai Jagannath Jag Ke Nath) एक अत्यंत भावपूर्ण और श्रद्धामयी भजन है, जो भगवान श्री जगन्नाथ की असीम कृपा, दया और भक्तवत्सल स्वरूप का सुंदर वर्णन करता है। इस भजन में भगवान जगन्नाथ को संपूर्ण जगत के पालनहार, दुःखियों के सहारा और अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करने वाले प्रभु के रूप में स्मरण किया गया है।

भजन (Jai Jai Jagannath Jag Ke Nath) के माध्यम से श्री जगन्नाथ धाम पुरी की दिव्यता, मंदिर की पवित्रता तथा भगवान के विभिन्न पवित्र स्थलों का भी सुंदर उल्लेख मिलता है। साथ ही, भगवान बलभद्र, माता सुभद्रा और श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप का स्मरण करते हुए यह भजन भक्तों के हृदय में गहरी आस्था और प्रेम का संचार करता है। इसकी प्रत्येक पंक्ति यह विश्वास जगाती है कि जो सच्चे मन से भगवान जगन्नाथ का स्मरण करता है, उसके जीवन की कठिनाइयाँ धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।

यह भजन केवल स्तुति नहीं, बल्कि पूर्ण समर्पण, विश्वास और भक्ति का संदेश भी देता है। सामूहिक कीर्तन, मंदिरों, धार्मिक आयोजनों तथा व्यक्तिगत पूजा के समय गाया जाने वाला यह भजन मन को शांति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है। भगवान जगन्नाथ की असीम कृपा सभी भक्तों पर सदैव बनी रहे, यही इस भजन का मूल भाव है।

जय जय जगन्नाथ जग के नाथ – भजन (Jai Jai Jagannath Jag Ke Nath – Bhajan) हिंदी में

जय जय जगन्नाथ जग के नाथ
हम तुम्हें भजते हैं दिन रात
जिनका न कोई तुम उनके साथ
हम तुम्हें भजते हैं दिन रात

पुरी की पावन नगरी में
फलदाई तेरा धाम है
वहां के कण-कण में बसा
प्रभु तुम्हारा नाम है
करुणा की करते नित बरसात
हम तुम्हें भजते हैं दिन रात
जिनका न कोई तुम उनके साथ
हम तुम्हें भजते हैं दिन रात

फाग मंडप में है प्रभु
तेरा सदा निवास है
जहां तुम्हारे भक्तों की
पूर्ण होती आस है
बनते सभी की बिगड़ी बात
हम तुम्हें भेजते हैं दिन रात
जिनका न कोई तुम उनके साथ
हम तुम्हें भजते हैं दिन रात

प्यारा तुम्हारा जगमोहन
नित्यशाला का नाम है।
भक्तों की मनमोहना
जहां तुम्हारा काम है
पूछते सबके दिल की बात
हम तुम्हें भेजते हैं दिन-रात
जिनका न कोई तुम उनके साथ
हम तुम्हें भजते हैं दिन रात

मुख्य साला में भक्तों की
सदा ही रहती भीड़ है
तुम जब जगाते जागते
सोई तकदीर है
उनके संवरते हैं हालात हम
तुम्हें भेजते हैं दिन रात
जिनका न कोई तुम उनके साथ
हम तुम्हें भजते हैं दिन रात

दर्शन होते जहां तेरे
उसको विमान कहते हैं
अद्भुत तेरी करुणा के
वहां पर झरने बहते है
सुखों की मिलती है जहां सौगात
हम तुम्हें भेजते हैं दिन रात
जिनका न कोई तुम उनके साथ
हम तुम्हें भजते हैं दिन रात

दया की सिंधु तुम ही तो
जगत पिता जगदीश हो
दुख से पीड़ित प्राणी का
सुख का देते आशीष हो
थम के दुखियों के तुम हाथ
हम तुम्हें बजाते हैं दिन रात
जिनका न कोई तुम उनके साथ
हम तुम्हें भजते हैं दिन रात

एक तरफ है सुभद्रा जी
दुसरी तरफ बलराम है
इन दोनों के बीच खड़े
देवकी के सुत घनश्याम है
सृष्टि के स्वामी तुम हो नाथ
हम तुम्हें भेजते हैं दिन रात
जिनका न कोई तुम उनके साथ
हम तुम्हें भजते हैं दिन रात

जग के सताए जीव को
सिर्फ तेरा ही आसरा
तुमसा दयालु विश्व में
और कोई न दूसरा
हमें भी दिखाओ कोई करामात
हम तुम्हें भेजते हैं दिन रात
जिनका न कोई तुम उनके साथ
हम तुम्हें भजते हैं दिन रात

जय जय जगन्नाथ जग के नाथ
हम तुम्हें भजते हैं दिन रात
जिनका न कोई तुम उनके साथ
हम तुम्हें भजते हैं दिन रात

जय जय जगन्नाथ जग के नाथ – भजन (Jai Jai Jagannath Jag Ke Nath – Bhajan) अंग्रेजी में

Jai Jai Jagannath Jag Ke Nath
Hum Tumhen Bhajte Hain Din Raat
Jinka Na Koi Tum Unke Sath
Hum Tumhen Bhajte Hain Din Raat

Puri Ki Pawan Nagri Mein
Phaladai Tera Dham Hai
Vahaan Ke Kan-Kan Mein Basa
Prabhu Tumhara Naam Hai
Karuna Ki Karte Nit Barsaat
Hum Tumhen Bhajte Hain Din Raat
Jinka Na Koi Tum Unke Sath
Hum Tumhen Bhajte Hain Din Raat

Phaag Mandap Mein Hai Prabhu
Tera Sada Niwas Hai
Jahan Tumhare Bhakton Ki
Poorn Hoti Aas Hai
Banate Sabhi Ki Bigdi Baat
Hum Tumhen Bhajte Hain Din Raat
Jinka Na Koi Tum Unke Sath
Hum Tumhen Bhajte Hain Din Raat

Pyara Tumhara Jagamohan
Nityashala Ka Naam Hai.
Bhakton Ki Manamohana
Jahan Tumhara Kaam Hai
Puchhte Sabke Dil Ki Baat
Ham Tumhen Bhejate Hain Din-Raat
Jinka Na Koi Tum Unke Sath
Hum Tumhen Bhajte Hain Din Raat

Mukhy Saala Mein Bhakton Ki
Sada Hi Rahati Bheed Hai
Tum Jab Jagate Jagate
Soi Takdir Hai
Unke Sanwarte Hain Halat Hum
Tumhen Bhejate Hain Din Raat
Jinka Na Koi Tum Unke Sath
Hum Tumhen Bhajte Hain Din Raat

Darshan Hote Jahan Tere
Usko Viman Kahte Hain
Adbhut Teri Karuna Ke
Wahan Par Jharne Bahate Hai
Sukhon Ki Milti Hai Jahaan Saugat
Hum Tumhen Bhajte Hain Din Raat
Jinka Na Koi Tum Unke Sath
Hum Tumhen Bhajte Hain Din Raat

Daya Ki Sindhu Tum Hi to
Jagat Pita Jagadish Ho
Dukh Se Peedit Prani Ka
Sukh Ka Dete Aashish Ho
Tham Ke Dukhiyon Ke Tum Hath
Hum Tumhen Bhajte Hain Din Raat
Jinka Na Koi Tum Unke Sath
Hum Tumhen Bhajte Hain Din Raat

Ek Taraph Hai Subhadra Ji
Dusri Taraph Balram Hai
in Donon Ke Beech Khade
Devki Ke Sut Ghanshyam Hai
Srishti Ke Swami Tum Ho Nath
Hum Tumhen Bhajte Hain Din Raat
Jinka Na Koi Tum Unke Sath
Hum Tumhen Bhajte Hain Din Raat

Jag Ke Satae Jeev Ko
Sirph Tera Hi Aasra
Tumsa Dayalu Vishwa Mein
Aur Koi Na Dusra
Humen Bhi Dikhao Koi Karamat
Hum Tumhen Bhajte Hain Din Raat
Jinka Na Koi Tum Unke Sath
Hum Tumhen Bhajte Hain Din Raat

Jai Jai Jagannath Jag Ke Nath
Hum Tumhen Bhajte Hain Din Raat
Jinka Na Koi Tum Unke Sath
Hum Tumhen Bhajte Hain Din Raat

जय जय जगन्नाथ जग के नाथ – भजन (Jai Jai Jagannath Jag Ke Nath – Bhajan) पीडीएफ


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जय जय जगन्नाथ जग के नाथ – भजन (Jai Jai Jagannath Jag Ke Nath – Bhajan) FAQ

जय जय जगन्नाथ जग के नाथ – भजन के गीतकार कौन है ?

जय जय जगन्नाथ जग के नाथ – भजन के गीतकार रुषा दत्ता जी है।

जय जय जगन्नाथ जग के नाथ – भजन का मुख्य संदेश क्या है ?

जय जय जगन्नाथ जग के नाथ – भजन ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण, विश्वास और भक्ति का संदेश देता है।

जय जय जगन्नाथ जग के नाथ – भजन किस समय श्रवण व पाठ किया जाता है ?

जय जय जगन्नाथ जग के नाथ – भजन सामूहिक कीर्तन, मंदिरों, धार्मिक आयोजनों तथा व्यक्तिगत पूजा के समय गाया व सुना जाता है।

जय जय जगन्नाथ जग के नाथ – भजन का मूल भाव क्या है ?

भगवान जगन्नाथ की असीम कृपा सभी भक्तों पर सदैव बनी रहे, यही इस भजन का मूल भाव है।

जय जय जगन्नाथ जग के नाथ – भजन (Jai Jai Jagannath Jag Ke Nath – Bhajan) वीडियो

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