चतुर्भुज जगन्नाथ (Chaturbhuja Jagannatha) भगवान श्री जगन्नाथ की महिमा को समर्पित एक अत्यंत भावपूर्ण भजन है, जिसमें उनके दिव्य स्वरूप, करुणा और भक्तों के प्रति प्रेम का सुंदर चित्रण मिलता है। इस स्तुति में उन्हें पद्मनाभ, पुरुषोत्तम, गोविंद, माधव, मधुसूदन, केशव, लोकनाथ और विष्णु जैसे अनेक पवित्र नामों से स्मरण किया गया है।
भजन का मुख्य भाव यह है कि भगवान जगन्नाथ केवल पुरी धाम के आराध्य नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के पालनकर्ता, दीनों के सहारा और सभी जीवों के रक्षक हैं। भगवान जगन्नाथ के चतुर्भुज रूप में शंख, चक्र, गदा और पद्म की शोभा भक्तों के मन में श्रद्धा, विश्वास और भक्ति का संचार करती है। नीलाचल धाम, महावैकुण्ठ और माता लक्ष्मी के साथ उनके दिव्य संबंध का उल्लेख इस स्तुति को और भी पावन बना देता है।
यह भजन सुनने या गाने से मन शांत होता है, नकारात्मकता दूर होती है और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना गहरी होती है। रथ यात्रा, मंदिरों के कीर्तन और दैनिक पूजा में इसका विशेष महत्व माना जाता है।
विषय सूची
चतुर्भुज जगन्नाथ – भजन (Chaturbhuja Jagannatha – Bhajan)
चतुर्भुज जगन्नाथ
कंठ शोभित कौसतुभः ॥
पद्मनाभ, बेडगरवहस्य,
चन्द्र सूरज्या बिलोचनः
जगन्नाथ, लोकानाथ,
निलाद्रिह सो पारो हरि
दीनबंधु, दयासिंधु,
कृपालुं च रक्षकः
कम्बु पानि, चक्र पानि,
पद्मनाभो, नरोतमः
जग्दम्पा रथो व्यापी,
सर्वव्यापी सुरेश्वराहा
लोका राजो, देव राजः,
चक्र भूपह स्कभूपतिहि
निलाद्रिह बद्रीनाथशः,
अनन्ता पुरुषोत्तमः
ताकारसोधायोह, कल्पतरु,
बिमला प्रीति बरदन्हा
बलभद्रोह, बासुदेव,
माधवो, मधुसुदना
दैत्यारिः, कुंडरी काक्षोह, बनमाली
बडा प्रियाह, ब्रम्हा बिष्णु, तुषमी
बंगश्यो, मुरारिह कृष्ण केशवः
श्री राम, सच्चिदानंदोह,
गोबिन्द परमेश्वरः
बिष्णुुर बिष्णुुर, महा बिष्णुपुर,
प्रवर बिशणु महेसरवाहा
लोका कर्ता, जगन्नाथो,
महीह करतह महजतहह ॥
महर्षि कपिलाचार व्योह,
लोका चारिह सुरो हरिह
वातमा चा जीबा पालसाचा,
सूरह संगसारह पालकह
एको मीको मम प्रियो ॥
ब्रम्ह बादि महेश्वरवरहा
दुइ भुजस्च चतुर बाहू,
सत बाहु सहस्त्रक
पद्म पितर बिशालक्षय
पद्म गरवा परो हरि
पद्म हस्तेहु, देव पालो
दैत्यारी दैत्यनाशनः
चतुर मुरति, चतुर बाहु
शहतुर न न सेवितोह …
पद्म हस्तो, चक्र पाणि
संख हसतोह, गदाधरह
महा बैकुंठबासी चो
लक्ष्मी प्रीति करहु सदा ।
चतुर्भुज जगन्नाथ – भजन (Chaturbhuja Jagannatha – Bhajan) अंग्रेजी में
Chaturbhuja Jagannatha
Kantha Sobhita Koustubhaha.. ॥
Padmanaavo, Bedagarvah,
Chandra Surjya Bilochanaha
Jagannatha, Lokanaatha,
Niladrih Sah Paro Hari
Dinabandhurr, Dayasindhu,
Krupaaluh Chana Rakshyakah
Kambu Paani, Chakra Paani,
Padmanaavo, Narattamah…
Jagatang Paaloko Byaapi,
Sarba Byaapi Suresworaaha
Loka Raajo, Deva Raajo,
Chakra Bhupah Schabhupatihhi
Niladrih Badrinaathah Scha,
Aanantah Purusottamahha
Taarkshodhyaayoh, Kalpataruhh,
Bimalaa Priti Bardhanaha
Balabhadroh , Baasudevoh
, Maadovoh, Modhusudanah
Daytaarih, Kundori Kaakshyoh, Banamaali
Bada Priyahah, Bramhaa Bishnuh, Tushmei
Bangshyo, Muraarih Krushna Kesavah
Sri Rama, Sachhidaanandoh,
Gobindah Poromesworoh
Bishnur Bishnur, Moha Bishnur,
Pravah Bishnur Maheswarahha
Loka Kartaa, Jagannatho,
Mahih Kartaah Mahajataahh… ॥
Maharshihi Kapilaachar Vyoh,
Loka Chaarih Suro Harihh
Vaatmaa Cha Jiba Paalascha,
Suraah Sangsaarah Paalakah
Eko Meko Mama Priyo.. ॥
Bramahah Baadi Maheswarahha
Dui Bhujo Scho Chatur Baahu,
Sata Baahu Sahastrahah
Padma Patra Bishalakshya
Padma Garva Paro Hari
Padma Hastoh, Deva Paalo
Daitaari Daitanasanaha
Chaturr Murti, Chaturr Baahu
Schaturr Naa Nana Sevitoh…
Padma Hastoh, Chakra Paani
Sankha Hastoh, Gadaadharah
Maha Baikunthabasi Cho
Laxmi Priti Karah Sadaa ।
चतुर्भुज जगन्नाथ – भजन (Chaturbhuja Jagannatha – Bhajan) पीडीएफ
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चतुर्भुज जगन्नाथ – भजन (Chaturbhuja Jagannatha – Bhajan) FAQ
चतुर्भुज जगन्नाथ – भजन के गीतकार कौन है ?
चतुर्भुज जगन्नाथ – भजन के गीतकार सुभाष दास जी और नमिता अग्रवाल जी है।
चतुर्भुज जगन्नाथ – भजन का मुख्य भाव क्या है ?
चतुर्भुज जगन्नाथ – भजन का मुख्य भाव यह है कि भगवान जगन्नाथ केवल पुरी धाम के आराध्य नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के पालनकर्ता, दीनों के सहारा और सभी जीवों के रक्षक हैं।
चतुर्भुज जगन्नाथ का क्या अर्थ है ?
भगवान जगन्नाथ के चतुर्भुज रूप में शंख, चक्र, गदा और पद्म की शोभा भक्तों के मन में श्रद्धा, विश्वास और भक्ति का संचार करती है।
चतुर्भुज जगन्नाथ – भजन (Chaturbhuja Jagannatha – Bhajan) वीडियो
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