कौन दिशा में तोरी बाजे रे मुरलिया (Kaun disha mein tori Baaje re muraliya)

कौन दिशा में तोरी बाजे रे मुरलिया (Kaun disha mein tori Baaje re muraliya) यह भजन भगवान श्री कृष्ण के मुरली की आवाज और उसके दर्शन के बैचेनी का वर्णन करता है। भजन के माध्यम से बताया गया की जब जब भगवान श्री कृष्ण अपनी मुरली बजाते थे, तो मुरली से आने वाली मधुर स्वर के माध्यम से प्रभु के दर्शन के मन व्याकुल हो जाता था।

यह भजन भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के दिव्य प्रेम को समर्पित है। भजन मुख्यतः कृष्ण मंदिर, राधा रानी मंदिर, इस्कॉन मंदिर, वृंदावन दर्शन, भजन कीर्तन के समय, साधना और कृष्नजामाष्टमी आदि त्यौहार के अवसर पर सुना व पाठ किया जाता है।

कौन दिशा में तोरी बाजे रे मुरलिया – भजन (Kaun disha mein tori Baaje re muraliya – Bhajan) हिंदी में

कौन दिशा में तोरी,
बाजे रे मुरलिया,
सूरत प्यारी ओ बनवारी,
जरा देखन दे देखन दे,
कौन दिशा में तेरी,
बाजे रे मुरलिया।।

मुरली की धुन सुनके सभी है,
दर्शन को बेचैन हो,
राधा की सुधबुध खोई है,
कैसे कटेगी रैन हो,
पंख पखेरू अरु नर नारी,
सबके व्याकुल नैन हो,
अंखियों से दूर कहां,
गया ओ रे छलिया,
सूरत प्यारी ओ बनवारी,
जरा देखन दे देखन दे,
कौन दिशा में तेरी,
बाजे रे मुरलिया

गोकुल वासी भी व्याकुल है,
कब आओगे गांव हो,
गोपी हो या ब्रज बालाएं,
सबके थक गए पांव हो,
आओ मोहन तुमको पुकारे,
आज कदम की छांव हो,
तुमको पुकारे कान्हा,
राधा की पायलिया,
सूरत प्यारी ओ बनवारी,
जरा देखन दे देखन दे,
कौन दिशा में तेरी,
बाजे रे मुरलिया।

फिर से फोड़ो राधा की मटकी,
तुम कंकरिया मार दो,
प्रेम के भूखे सब ही यहां पर,
सबको आकर प्यार दो,
विप्र सुदामा को तारे हो जैसे,
भक्तों को भी तार दो,
गईया चराने आओ,
छोड़ के महलिया,
सूरत प्यारी ओ बनवारी,
जरा देखन दे देखन दे,
कौन दिशा में तेरी,
बाजे रे मुरलिया।

कौन दिशा में तोरी बाजे रे मुरलिया – भजन (Kaun disha mein tori Baaje re muraliya – Bhajan) अंग्रेजी में

Kaun disha mein tori,
Baaje re muraliya,
Surat pyari o Banwari,
Zara dekhan de dekhan de,
Kaun disha mein teri,
Baaje re muraliya.

Murli ki dhun sunke sabhi hai,
Darshan ko bechain ho,
Radha ki sudh-budh khoi hai,
Kaise kategi rain ho,
Pankh pakheru aru nar naari,
Sabke vyakul nain ho,
Ankhiyon se door kahan,
Gaya o re chhaliya,
Surat pyari o Banwari,
Zara dekhan de dekhan de,
Kaun disha mein teri,
Baaje re muraliya.

Gokul vaasi bhi vyakul hai,
Kab aaoge gaon ho,
Gopi ho ya Braj balaayein,
Sabke thak gaye paon ho,
Aao Mohan tumko pukare,
Aaj kadam ki chhaon ho,
Tumko pukare Kanha,
Radha ki payaliya,
Surat pyari o Banwari,
Zara dekhan de dekhan de,
Kaun disha mein teri,
Baaje re muraliya.

Phir se phodo Radha ki matki,
Tum kankariya maar do,
Prem ke bhookhe sab hi yahan par,
Sabko aakar pyaar do,
Vipra Sudama ko taare ho jaise,
Bhakton ko bhi taar do,
Gaiya charane aao,
Chhod ke mahalia,
Surat pyari o Banwari,
Zara dekhan de dekhan de,
Kaun disha mein teri,
Baaje re muraliya.

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