जब जिद पे आ गई पार्वती (Jab Zid Pe Aa Gayi Parvati)

जब जिद पे आ गई पार्वती (Jab Zid Pe Aa Gayi Parvati) भजन माता पार्वती और भगवान भोलेनाथ के प्रेम, समर्पण और विवाह प्रसंग को बहुत ही सरल भाषा में प्रस्तुत करता है। भजन में बताया गया है कि जब माता पार्वती भगवान शिव को अपना वर चुनने पर अडिग हो जाती हैं, तब सप्तऋषि उन्हें समझाने के लिए आते हैं। वे शिवजी के अनोखे रूप और तपस्वी जीवन का वर्णन करते हुए कहते हैं कि उनके सिर पर गंगा विराजमान हैं, गले में सर्प है, शरीर पर भस्म है और वे साधारण गृहस्थ जीवन से दूर एक अवधूत के रूप में रहते हैं।

भजन की खास बात इसकी सहज और मनोरंजक भाषा है। इसमें भगवान शिव के सरल स्वभाव और वैराग्य को ग्रामीण लोकशैली में खूबसूरती से बताया गया है। जटाधारी शिव, मस्तक पर चंद्रमा, गले में नाग और उनके भोले स्वभाव का वर्णन भजन को भक्तिमय होने के साथ-साथ रोचक भी बनाता है।

माता पार्वती के लिए भगवान शिव का बाहरी रूप या उनका साधारण जीवन कोई मायने नहीं रखता। उनका विश्वास और प्रेम इतना गहरा है कि वे अपने संकल्प से पीछे नहीं हटतीं। यही इस भजन का सबसे सुंदर भाव है कि सच्ची भक्ति और प्रेम दिखावे से नहीं, बल्कि विश्वास, समर्पण और मन की भावना से जुड़ा होता है। यह भजन शिव-पार्वती की भक्ति और दिव्य प्रेम को याद करने का सुंदर माध्यम है।

विषय सूची

जब जिद पे आ गई पार्वती (Jab Zid Pe Aa Gayi Parvati) -भजन जानकारी

भजन के बोलजब जिद पे आ गई पार्वती॥
गीतकारश्री साधू तिवारी जी
लिरिक्सश्री साधू तिवारी जी
म्यूजिकश्री साधू तिवारी जी और समीरन दास जी
मूवीहनुमान अंश (2026)

जब जिद पे आ गई पार्वती (Jab Zid Pe Aa Gayi Parvati) -भजन

जब जिद पे आ गई पार्वती
समझाने पहुँचे सप्तऋषि
काय ज़िद कर रही
काय को मर रही
ऐसे वर के लाने
जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे साँप
इतने सीधे-सादे हैं, सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ

ना खपरा ना छपरा
ना फूस की धरे मड़इया
का खावे को धरो वहाँ
बस रोवत रहत लड़इया
भेष धरे अवधूत फिरे, अब तुमसे का कहे बिन्नू
डोरा डांगर ले घूमें
वे इनके कछुए नइयाँ
काय ज़िद कर रही
काय को मर रही
ऐसे वर के लाने
जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे साँप
इतने सीधे-सादे हैं, सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ

जटा लटा न कबहुँ सँवारे,
दीसत महा भयंकर।
मूड़ पे आधो चंदा और,
बेला पे घूमे शंकर
राम नाम के रसिया हैं वे
और उन्हें क्या चाहने
कामदेव के मर्दनहारी
घर-गृहस्थी क्या जाने
अरे घर-गृहस्थी क्या जाने
काय ज़िद कर रही
काय तप कर रही
ऐसे वर के लाने
जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे साँप
इतने सीधे-सादे हैं, सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ

जब जिद पे आ गई पार्वती (Jab Zid Pe Aa Gayi Parvati) -भजन अंग्रेजी में

Jab Zid Pe Aa Gayi Parvati
Samjhane Pahunche Sapt Rishi
Kaay Zid Kar Rahi
Kaay Ko Mar Rahi
Aise Var Ke Laane
Jaake Sees Pe Ganga Aur Gale Mein
Daale Phir Rahe Saanp
Itne Seedhe-Saade Hain, Sab Kehte Bholenath, Bholenath

Na Khapra Na Chhapra
Na Foos Ki Dhare Madaiya
Ka Khaave Ko Dharo Wahan
Bas Rovata Rahat Ladaiyaa
Bhesh Dhare Avdhoot Phire, Ab Tumse Ka Kahe Binnu
Dora Dangar Le Ghoomein
Ve Inke Kachhuye Naiyya
Kaay Zid Kar Rahi
Kaay Ko Mar Rahi
Aise Var Ke Laane
Jaake Sees Pe Ganga Aur Gale Mein
Daale Phir Rahe Saanp
Itne Seedhe-Saade Hain, Sab Kehte Bholenath, Bholenath

Jata Lata Na Kabahun Sanwaare,
Deesat Maha Bhayankar.
Moor Pe Aadho Chanda Aur,
Bela Pe Ghoome Shankar
Ram Naam Ke Rasiya Hain Ve
Aur Unhe Kya Chaahne
Kaamdev Ke Mardanhaari
Ghar-Grihasthi Kya Jaane
Are Ghar-Grihasthi Kya Jaane

Kaay Zid Kar Rahi
Kaay Tap Kar Rahi
Aise Var Ke Laane
Jaake Sees Pe Ganga Aur Gale Mein
Daale Phir Rahe Saanp
Itne Seedhe-Saade Hain, Sab Kehte Bholenath, Bholenath

जब जिद पे आ गई पार्वती (Jab Zid Pe Aa Gayi Parvati) -भजन पीडीएफ


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जब जिद पे आ गई पार्वती (Jab Zid Pe Aa Gayi Parvati) -भजन FAQ

इस भजन में किस प्रसंग को बताया गया है?

इस भजन में माता पार्वती और भगवान शिव से जुड़ा विवाह प्रसंग सामने आता है। माता पार्वती शिवजी को अपना जीवनसाथी बनाने का मन बना चुकी हैं, जबकि सप्तऋषि उन्हें शिवजी के तपस्वी जीवन और अलग स्वभाव के बारे में समझाने की कोशिश करते हैं।

सप्तऋषि पार्वती जी को शिवजी के बारे में क्या बताते हैं?

सप्तऋषि शिवजी के साधारण और वैरागी जीवन का उदाहरण देते हैं। वे बताते हैं कि शिवजी राजसी सुख-सुविधाओं से दूर रहते हैं, जटाएं धारण करते हैं और उनके गले में सर्प रहता है।

भजन में शिवजी के स्वरूप को किस तरह दिखाया गया है?

भजन में भोलेनाथ को जटाधारी, गले में नाग धारण करने वाले और सिर पर गंगा तथा चंद्रमा रखने वाले तपस्वी देव के रूप में बताया गया है। उनका रूप भले ही अनोखा लगे, लेकिन उनका स्वभाव सरल और भोला है।

माता पार्वती अपने निर्णय पर अडिग क्यों रहती हैं?

माता पार्वती के मन में भगवान शिव के लिए गहरी श्रद्धा और विश्वास है। इसलिए वे शिवजी के बाहरी रूप या उनके रहन-सहन को देखकर अपना निर्णय नहीं बदलतीं।

भगवान शिव को भोलेनाथ क्यों कहा जाता है?

भगवान शिव को भोलेनाथ उनके सरल और सहज स्वभाव के कारण कहा जाता है। भक्तों की सच्ची भावना और श्रद्धा को महत्व देने वाले देव के रूप में उनकी विशेष मान्यता है।

इस भजन का मुख्य भाव क्या है?

भजन का मुख्य भाव प्रेम, विश्वास और समर्पण है। माता पार्वती का चरित्र यह दिखाता है कि सच्ची श्रद्धा केवल बाहरी रूप देखकर नहीं बदलती। मन में विश्वास हो तो कठिन परिस्थितियों में भी व्यक्ति अपने संकल्प पर कायम रह सकता है।

यह भजन कब सुनना अच्छा लगता है?

यह भजन भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति के अवसर पर सुना जा सकता है। विशेष रूप से सावन, शिवरात्रि या शिव-पार्वती से जुड़े धार्मिक आयोजनों में इसका आनंद लिया जा सकता है।

जब जिद पे आ गई पार्वती (Jab Zid Pe Aa Gayi Parvati) -भजन वीडियो

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