मेरे उठे विरह में पीर – भजन (Mere Uthe Virah Me Pir)

मेरे उठे विरह में पीर – भजन (Mere Uthe Virah Me Pir) श्री राधा-श्याम के प्रति अटूट प्रेम, समर्पण और विरह की गहरी अनुभूति को व्यक्त करता है। भजन में एक भक्त अपने मन की व्यथा श्री श्यामा के सामने रखता है और संसार के सभी मोह-माया से दूर होकर वृन्दावन जाने की इच्छा प्रकट करता है। श्याम की मनमोहक छवि, उनकी मधुर मुरली और यमुना के पावन तट की कल्पना भक्त के हृदय में प्रेम और भक्ति की लहर जगा देती है।

“सखी वृन्दावन जाऊंगी” की बार-बार आती पंक्ति भक्त के मन में बसे उस दृढ़ संकल्प को दर्शाती है, जिसमें उसे केवल अपने आराध्य के दर्शन की चाह है। श्याम की याद में भोजन-पानी तक छूट जाना और आंखों से आंसुओं का बहना प्रेम की गहराई को दर्शाता है। गिरधारी से नैन मिलने के बाद भक्त का संसार से अनजान हो जाना यह बताता है कि सच्चा कृष्ण प्रेम इंसान को भीतर से बदल देता है।

यह भजन सुनने वाले के मन में राधा-कृष्ण के प्रति श्रद्धा, प्रेम और वृन्दावन की आध्यात्मिक अनुभूति जगाता है। भक्ति, विरह और समर्पण से भरा यह भजन मन को शांति और भाव-विभोर कर देने वाला है।

विषय सूची

मेरे उठे विरह में पीर – भजन (Mere Uthe Virah Me Pir – Bhajan) हिंदी में

श्लोक
सब द्वारन को छोड़ के,
श्यामा आई तेरे द्वार,
श्री वृषभान की लाड़ली,
मेरी और निहार ॥

मेरे उठे विरह में पीर,
सखी वृन्दावन जाउंगी,
मुरली बाजे यमुना तीर,
सखी वृन्दावन जाउंगी ॥

श्याम सलोनी सूरत पे,
दीवानी हो गई,
अब कैसे धारू धीर सखी,
सखी वृन्दावन जाउंगी ॥

छोड़ दिया मेने भोजन पानी,
श्याम की याद में,
मेरे नैनन बरसे नीर,
सखी वृन्दावन जाउंगी ॥

इस दुनिया के रिश्ते नाते,
सब ही तोड़ दिए,
तुझे कैसे दिखाऊं दिल चिर,
सखी वृन्दावन जाउंगी ॥

नैन लड़े मेरे गिरधारी से,
बावरी हो गई,
दुनिया से हो गई अंजानी,
सखी वृन्दावन जाउंगी ॥

मेरे उठे विरह में पीर,
सखी वृन्दावन जाउंगी,
मुरली बाजे यमुना तीर,
सखी वृन्दावन जाउंगी ॥

मेरे उठे विरह में पीर – भजन (Mere Uthe Virah Me Pir – Bhajan) अंग्रेजी में

Shlok-
Sab Dwaran Ko Chod Ke,
Shyam Aae Tere Dwar,
Shree Brushbhan Ki Ladli,
Meri Aur Nihar ॥

Mere Uthe Virah Me Pir,
Sakhi Brundaban Jaungi,
Murali Baje Yamuna Tir,
Sakhi Brundaban Jaungi ॥

Shyam Saloni Surat Pe,
Diwani Ho Gae,
Ab Kese Dharu Dhir Shakhi,
Sakhi Brundaban Jaungi ॥

Chod Diya Maine Bhojan Pani,
Shyam Ki Yaad Mein,
Mere Nainan Barse Nir,
Sakhi Brundaban Jaungi ॥

Is Duniya Ke Rishte Nate,
Sab Hi Chod Diya,
Tujhe Kese Dikhaun Dil Chir,
Sakhi Brundaban Jaungi ॥

Nain Lade Mere Girdhar Se,
Babri Ho Gae,
Duniya Se Ho Gae Anjani,
Sakhi Brundaban Jaungi ॥

Mere Uthe Virah Me Pir,
Sakhi Brundaban Jaungi,
Murali Baje Yamuna Tir,
Sakhi Brundaban Jaungi ॥

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मेरे उठे विरह में पीर – भजन (Mere Uthe Virah Me Pir – Bhajan) FAQ

मेरे उठे विरह में पीर – भजन किस देवी-देवता को समर्पित है ?

मेरे उठे विरह में पीर – भजन श्री राधा-श्याम देवी-देवता को समर्पित है।

मेरे उठे विरह में पीर – भजन क्या व्यक्त करता है ?

मेरे उठे विरह में पीर – भजन श्री राधा-श्याम के प्रति अटूट प्रेम, समर्पण और विरह की गहरी अनुभूति को व्यक्त करता है।

मेरे उठे विरह में पीर – भजन में किस प्रकार की भक्ति की झलक दिखाई देती है ?

मेरे उठे विरह में पीर – भजन में श्री राधा-श्याम के मध्य भक्तिमय प्रेम की झलक दिखाई देती है।

मेरे उठे विरह में पीर – भजन हमें क्या संदेश देता है ?

मेरे उठे विरह में पीर – भजन हमें यह संदेश देता है की यदि कोई भक्त सच्चे प्रेम और भक्ति में अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पण करता है, तो वह इस सांसारिक मोह-माया से अधिक ऊपर उठ जाता है।

मेरे उठे विरह में पीर – भजन में भक्त क्यों वृन्दावन जाने की इच्छा प्रकट करता है।

मेरे उठे विरह में पीर – भजन में भक्त इसलिए न्दावन जाने की इच्छा प्रकट करता है क्योंकि श्री श्याम की मनमोहक छवि, उनकी मधुर मुरली और यमुना के पावन तट की कल्पना भक्त के हृदय में प्रेम और भक्ति की लहर जगा देती है।

मेरे उठे विरह में पीर – भजन के गीतकार कौन है ?

मेरे उठे विरह में पीर – भजन के गीतकार रसिक संत श्री बाबा चित्र-विचित्र बिहारी दास महाराज जी है।

मेरे उठे विरह में पीर – भजन (Mere Uthe Virah Me Pir – Bhajan) वीडियो

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